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Monday, March 23, 2026

68 लाख किलो नकली घी से बना भगवान का प्रसाद, मंदिर बोर्ड के पूर्व प्रमुख से पूछताछ


आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में चढ़ाए जाने वाले लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले नकली घी मामले में मंदिर बोर्ड के पूर्व प्रमुख से पूछताछ हुई है। जांच एजेंसी ने मंगलवार को तिरुमाला घी में कथित मिलावट मामले में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के पूर्व प्रमुख ए.वी. धर्म रेड्डी से पूछताछ की।

दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम ने जांच के दौरान पाया कि आंध्र प्रदेश में तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पवित्र तिरुपति लड्डू प्रसादम की तैयारी में कथित तौर पर मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया था। तिरुपति मंदिर के पूर्व प्रमुख ए.वी. धर्म रेड्डी, जो टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) के रूप में कार्यरत थे, मामले की विस्तृत जांच के लिए तिरुपति में एसआईटी कार्यालय के समक्ष पेश हुए।

68 लाख किलोग्राम नकली घी
जांच एजेंसी के अनुसार, टीटीडी को 2019 से 2024 तक पांच साल की अवधि में लगभग 250 करोड़ रुपये मूल्य का अनुमानित 68 लाख किलोग्राम नकली घी प्राप्त हुआ। ननेल्लोर एसीबी अदालत को सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट में विस्तृत जांच से पता चला कि प्राथमिक आपूर्तिकर्ता – उत्तराखंड स्थित एक डेयरी – ने दूध या मक्खन की एक भी बूंद खरीदे बिना इतनी बड़ी मात्रा में घी पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी।

कथित तौर पर “घी” को ताड़ के तेल, ताड़ की गिरी के तेल और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे औद्योगिक रसायनों का उपयोग करके संश्लेषित किया गया था, ताकि शुद्धता परीक्षण (रीचर्ट-मीसल मूल्य) में हेरफेर किया जा सके और टीटीडी की गुणवत्ता जांच से बचा जा सके।

बड़े पैमाने पर मिलावट
गौरतलब है कि पूर्व ईओ ए.वी. धर्म रेड्डी के कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर मिलावट हुई थी। टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी के करीबी और पूर्व निजी सहायक चिन्ना अप्पन्ना की हाल ही में हुई गिरफ्तारी के बाद जांच में नया मोड़ सामने आया है। अप्पन्ना पर कथित तौर पर अयोग्य डेयरियों को ठेके दिलाने और निविदा प्रक्रियाओं में हेराफेरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। अब पूर्व ईओ ए.वी. धर्म रेड्डी से पूछताछ चल रही है।

एसआईटी जारी कर सकती है नोटिस
एसआईटी इस मामले में पूछताछ के लिए टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी को भी नोटिस जारी कर सकती है। एजेंसी का लक्ष्य खरीद और गुणवत्ता नियंत्रण में हुई चूक के लिए जिम्मेदार पूरी कमान श्रृंखला का पता लगाना है, जिसने कथित तौर पर व्यापक रूप से प्रतिष्ठित प्रसादम की पवित्रता से समझौता किया।

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